आर्गेनिक फार्मिंग और खाद

आर्गेनिक फार्मिंग और खाद

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‘भोजन’ के बिना इंसान के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। हेल्दी लाइफ के लिए हेल्दी खाना सबसे अधिक जरूरी है। खाने में पौष्टिक तत्वों की कमी से हमारे हेल्थ पर असर पड़ता है। अतः आर्गेनिक फार्मिंग हमारे स्वस्थ जीवन के लिए सबसे बेहतर विकल्प है। आर्गेनिक फार्मिंग हमारे हेल्थ के लिए तो फायदेमंद है ही, मिट्टी की फर्टिलिटी बढ़ाने और उसे और अधिक उपजाऊ बनाने के लिए भी अत्यावश्यक है। इसके महत्व और फायदे को देखते हुए ही सिक्किम ने इसे पूरी तरह अपना लिया और पूर्ण आर्गेनिक फार्मिंग वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
यह प्रमाणित हो चुका है कि यूरिया और पेस्टिसाइड्स के अधिक प्रयोग से न सिर्फ भोजन (अन्न, सब्जी, फल आदि) की पोषकता में कमी आती है बल्कि यह मिट्टी के पोषण और उपजाऊ क्षमता के लिए भी हानिकारक है। अतः यह आवश्यक है कि यूरिया और पेस्टिसाइड्स के हानिकारक प्रभाव से इंसान और मिट्टी दोनों के हेल्थ को बचाने के लिए आर्गेनिक खेती को अपनाया जाये। आर्गेनिक फार्मिंग केवल यूरिया और पेस्टिसाइड्स के प्रयोग को रोकना नहीं है, बल्कि पर्यावरण तक इसका सुखद प्रभाव देखा जा सकता है। इससे मिट्टी की फर्टिलिटी तो बढ़ती ही है, भोजन की पोषकता में भी वृद्धि होती है। यूरिया और पेस्टिसाइड्स के रासायनिक तत्वों के इस्तमाल नहीं होने से खाने का स्वाद भी बढ़ जाता है और इसे लम्बे समय तक स्टोर भी किया जा सकता है।
आर्गेनिक खेती में इस्तेमाल होनेवाला ‘खाद’ पर्यावरण और हेल्थ दोनों के अनुकूल होता है। कृषि वैज्ञानिकों का भी मानना है कि आर्गेनिक खाद मिट्टी की फर्टिलिटी बढ़ाता है, हानिकारक कीटाणुओं से उन्हें दूर रखता है और फसलों की क्वालिटी में सुधार करता है। इसकी कीमत कम होती है और इस्तेमाल भी बेहद आसान है। बायो-डिग्रेडेबल होने की वजह से यह पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाता है और भोजन मेें हानिकारक केमिकल्स भी नहीं रहते।
इसी दिशा में ‘क्लीन इंडिया वेंचर्स’ ने ‘ग्रीन वेस्ट रिप्रोसेसर (जीडब्ल्यूआर)’ के रूप में एक ऐसी मशीन का आविष्कार किया है जो सभी प्रकार के ‘आर्गेनिक वेस्ट’ को अप-साइकिल कर इसे उपयोगी बायोमास आर्गेनिक खाद में परिवर्तित कर देता है। इस खाद का इस्तेमाल खेती में किया जा सकता है। यह मिट्टी की फर्टिलिटी बढ़ाने में सहायक है और पर्यावरण के अनुकूल भी है। कीमत कम होने की वजह से किसान इस आर्गेनिक खाद का पूरा उपयोग कर सकते हैं।
इस मशीन को सीओडी द्वारा दिल्ली कैंट क्षेत्र में लगाया गया है, जो इस क्षेत्र के सभी ग्रीन वेस्ट को अप-साइकिल कर उन्हें आर्गेनिक खाद में परिवर्तित कर देता है। वास्तव में, इस मशीन से सीओडी को तीन प्रकार से फायदा हो रहा है: पहला, इस क्षेत्र को ग्रीन वेस्ट से छुटकारा मिलता है। दूसरा, ग्रीन वेस्ट को अप-साइकिल करने से प्राप्त खाद का उपयोग कैंट एरिया के बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए किया जाता है और तीसरा, इससे प्राप्त फ़्यूल स्टिक्स की वजह से बैरक क्षेत्र में एलपीजी के उपयोग में काफी कमी आई है क्योंकि फ़्यूल स्टिक्स की वजह से लोगों को वैकल्पिक और सस्ता ईंधन प्राप्त होने लगा है।
पर्यावरण के मुद्दे पर सभी को गंभीर होने की आवश्यकता है। प्रदूषण से पर्यावरण को बचाने में जैविक खेती का महत्वपूर्ण रोल हो सकता है। इससे एनर्जी और पर्यावरण दोनों की रक्षा की जा सकती है।